राजनीति मे नेताओं की हार भी कभी बडी जीत का कारण बनकर आती है।

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30 May 2019 (Publish: 11:40 AM IST)

राजनीति मे नेताओं की हार भी कभी बडी जीत का कारण बनकर आती है।
राजस्थान मे महादेव सिह व कैलाश चोधरी के साथ ऐसा ही हुवा।

अशफाक कायमखानी।जयपुर।
कहते है कि हर एक नफे नूकसान मे ऊपर वाले मालिक की कुछ रजा छुपी होती है। राजनीति मे भी नेताओं की कभी कभार होने वाली हार मे कुछ अच्छाई छूपी होने के प्रमाण हमे भी कभी कभार देखने को मिलने के साथ लगता है कि महादेव सिंह व कैलाश चोधरी की विधानसभा चुनाव की हार के पीछे बडी जीत छूपी हुई थी।

2008 के राजस्थान विधानसभा चुनाव मे सीकर जिले की खण्डेला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार को तोर पर महादेव सिह खण्डेला चुनाव लड़े ओर वो चुनाव हार गये। लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव मे विधानसभा चुनाव हारे हुये महादेव सिंह को कांग्रेस ने सीकर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया तो वो चुनाव जीतकर सांसद बने गये। केंद्र मे कांग्रेस की मनमोहन सिंह के नेतृत्व मे सरकार बनी तो महादेव सिंह खण्डेला को उस सरकार मे मंत्री बना दिया गया।

महादेव सिह खण्डेला की ही तरह राजस्थान के बाडमेर जिले की बायतू विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार कैलाश चोधरी 2018 का चुनाव हार गये। एवं चार महिने बाद हुये 2019 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा ने कैलाश चोधरी को बाडमेर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाने पर वो चुनाव जीतकर सांसद बन गये। ओर आज नरेन्द्र मोदी मंत्रीमंडल मे सांसद कैलाश चोधरी को मंत्री बनाया जा रहा है।

अजीब संयोग है कि महादेव सिंह व कैलाश चोधरी दोनो जाट बीरादरी से तालूक रखने के साथ साथ दोनो मे से महादेव सिंह कांग्रेस से व कैलाश चोधरी भाजपा की तरफ से पहली दफा सांसद बनते ही केंद्र मे मंत्री बनने का दोनो को अवसर मिला। दोनो विधायक रहे ओर दोनो के विधायक रहते चुनाव हारने के बाद उन्हें लोकसभा का टिकट मिलते ही पहले झटके मे सांसद व मंत्री बन गये। जबकि दोनो ही राजस्थान के किसी भी मंत्रिमंडल के सदस्य अभी तक नही रह पाये है।

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