हाफिज क़ुरान को क़यामत के दिन सूरज से भी ज़ियादा रौशन ताज पहनाया जायेगा,मुफ़्ती फजलुर्रहमान इलाहाबादी

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29 May 2019 (Publish: 04:50 PM IST)

मऊआइमा के मोहल्ला बैरहना के मस्जिद बेलाल में क़ुरान के मुकम्मल होने पर मजलिस का आयोजन

29मई ,2019,मऊआइमा प्रयागराज ,
क़ुरान अत्यन्त पवित्र किताब है ,जिसको अल्लाह ने अपने नबी मोहम्मद साहब पर 23 साल के लंबे समय में अवतारित किया ,उक्त बातें युवा आलिम मुफ़्ती फजलुर्रहमान क़ासमी इलाहाबादी ने मऊआइमा क़स्बा स्थित मोहल्ला बैरहना के मस्जिद बेलाल में तरावीह में क़ुरान के एक दौर मुकम्मल होने पर कहीँ ,उन्होंने कहा क़ुरान को याद करने वाले हाफिज का इस्लाम में काफी महत्व है ,उन्होंने कहा नबी का फरमान है क़यामत के दिन हाफिज क़ुरान के माँ बाप को सूरज से ज़्यादा रौशन ताज पहनाया जायेगा ,उनको सम्मान से नवाजा जायेगा ,उन्होंने कहा जब माँ बाप के साथ इस तरह से सम्मान से नवाजा जायेगा ,तो खुद हाफिज का किया मक़ाम होगा आसानी के साथ अंदाज़ा लगाया जा सकता है ,

मुफ़्ती फजलुर्रहमान ने मुस्लिम समाज के लोगों से आग्रह किया कि वह खुद भी क़ुरान को सही अंदाज़ में पढ़ने की कोशिश करें और अपने बच्चों को भी क़ुरान की तालीम देने की फ़िक्र करें ,उन्होंने कहा रमज़ान की जो दिन बचें हुए हैं उनमें ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह की इबादत करें ,और गरीबों की मदद करने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें ताकि गरीब परिवार के लोग भी ईदुउल्फित्र का पर्व अच्छे से मना सकें ,उन्होंने कहा कि इस्लाम में गरीबों को दान करने उनकी मदद करने का बहुत ज़्यादा सवाब है ,मुफ़्ती फजलुर्रहमान ने कहा ईद की नमाज़ के लिए निकलने से पहले फ़ित्रा की रकम गरीबों को देदें ,उन्होंने कहा सद का की रकम इसलिए दी जाती है ताकि रोज़े में रह गयी कमी कोताही को दूर किया जा सके ,ईद के दिन जिसके पास साढ़े 24 हज़ार की रकम का मालिक है उस पर अपनी तरफ से और अपने परिवार वालों की तरफ से फ़ित्रा की निकालना वाजिब है ,

मुफ़्ती फजलुर्रहमान ने कहा इस बार मऊआइमा और आस पास इलाक़ो के लिए फ़ित्रा की रकम 30 रुपया प्रति आदमी है ,इसलिए ईदगाह निकलने से पहले ही इसी हिसाब से फ़ित्रा की रकम निकालें ,हाफिज अख़लाक़ की तिलावत समजलिस का आगाज़ हुवा मोहम्मद अफ़ज़ल ने नात पढ़ी ,इस अवसर पर हाफिज मोहम्मद शादाब ,हाफिज मोहम्मद ज़ुबैर ,हाफिज मोहम्मद रफ़ीक़,मोहम्मद कैफ ,बेलाल हसनैन ,अब्दुर्रहमान ,सैफ अंसारी ,और भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्तथित थे ,मुल्क की खुशहाली तरक़्क़ी आपसी भाई चारा के लिए खास तौर से दुआ येन की गयी

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